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What Causes Vitamin D Deficiency in Human Body? – Aaj Pakistan

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[संगीत] वेलकम बैक आफ्टर द ब्रेक। अच्छा जी। कई दफा लोग हेल्थ के हवाले से जब कॉन्शियस होना शुरू करते हैं तो वो नोटिस करते हैं कि यार अगर वजन बढ़ गया तो प्रॉब्लम्स बढ़ेंगी। एंड दैट इज ट्रू। ओबेसिटी इज द रूट कॉज ऑफ़ मेनी अदर हेल्थ कंडीशंस एंड प्रॉब्लम्स। लेकिन क्या आपने कभी स्किनी फैट के बारे में सुना है? यानी लोग बजाहिर बड़े चुस्त और तवाना और उनका वजन भी नहीं बढ़ा हुआ होता लेकिन बहुत सारी अंडरलाइंग हेल्थ कंडीशंस हेल्थ प्रॉब्लम्स उनको इफेक्ट कर रही होती हैं। उनका कोलेस्ट्रॉल बहुत हाई होता है और जब रिजल्ट्स आते हैं तो वो खुद चौंक जाते हैं कि यार मेरा तो वजन भी बढ़ा हुआ नहीं है। कोई एक्स्ट्रा चर्बी मुझे नजर नहीं आ रही है। लेकिन फिर क्या वजह है कि मेरा कोलेस्ट्रॉल इतना हाई है। सो लेट्स टॉक अबाउट पीपल जो कि बजाहिर आपको हेल्दी रखते हैं। उनका वजन भी वजन भी नहीं बढ़ रहा। लेकिन अंडरलाइन प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। इन प्रॉब्लम्स को कैसे एड्रेस किया जाए? व्हाट इज द रूट कॉज ऑफ इट? क्या यह जेनेटिक होता है? लाइफस्टाइल रिलेटेड है? फॉर दैट एंड मोर हमें गाइड करने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं डॉक्टर आयशा अब्बास। अस्सलाम वालेकुम आयशा। वालेकुम अस्सलाम। क्या हालचाल? व्हाट अ वंडरफुल कलर यू वेरिंग। थैंक यू सो मच। मुझे बताएं कि पहले तो हम यह कह रहे होते हैं कि बजाहिर अगर किसी शख्स का वजन अचानक से बढ़ा है, ज्यादा हुआ है, प्रॉबब्ली कुछ ना कुछ गड़बड़ है। लेकिन वो लोग जो नजर तो ऐसा आ रहा है कि बिल्कुल सही हैं। व्हाट कुड बी द रीज़न कि इनके कोलेस्ट्रॉल लेवल्स हाई है या इनका शुगर लेवल सही नहीं आ रहा। अच्छा इसमें ना हम इनका जब हिस्ट्री ले रहे होते हैं तो इसमें दो चीजें होती हैं। एक तो इसमें जेनेटिक्स बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है। उसमें कहीं ना कहीं हिस्ट्री में आ जाता है और दूसरा ये होता है कि इसमें स्ट्रेस और ए्जायटी वो भी रोल प्ले करते हैं। स्ट्रेस हॉर्मोंस इसमें रोल प्ले करते हैं। अच्छा इनको डील करना भी बहुत मुश्किल हो जाता है। यानी कि अंडरवेट लोग जब हमारे पास आते हैं बच्चे हैं या बड़े हैं तो उनका वेट कम है तो वो इसी उसके साथ आते हैं कि वी आर नॉट हैप्पी विद आवर वेट। तो हमें अपना वेट पुट ऑन करना है। लेकिन जब ब्लड टेस्ट होते हैं और उसमें आपका सिरम कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है। अब ये चीज कितना टैकल करना मुश्किल है। कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़े हुए हैं तो अब आप उनको बटर है, ऑयल है, घी है, मटन है इस टाइप की कोई भी चीज नहीं दे सकते। तो फिर क्या करें? तो उसमें जो चीज है वो यह है कि आप अपना मसल मास बिल्ड करें। मसल मास को बिल्ड आप करते हैं अच्छे तरीके से और अच्छी खुराक के जरिए तो डेफिनेटली आप अच्छा वेट कर सकते हैं क्योंकि अगर ओवरवेट होने के अपने बहुत कॉम्प्लिकेशंस हैं या मसाइल हैं तो इतना अंडरवेट होना आपका इम्यून सिस्टम भी बहुत वीक करता है और उससे भी आपको बहुत प्रॉब्लम्स होती है। अच्छा आयशा एक बड़ा कॉमन सवाल जो आता है पाकिस्तान में बहुत सारे लोग एनीमिया का शिकार हैं। बिलखसूस खवातीन कि उनका हीमोग्लोबिन कम होता है। आयरन लेवल्स कम होते हैं। खून की कमी के बायस क्या इंसान का वजन घटता है या बढ़ता है? कई दफा बहुत फूले-फूले जिनका वजन बढ़ा हुआ होता है उनके बारे में पता चलता है कि जी इनका तो हीमोग्लोबिन लेवल कम है और थकावट भी हो रही है। हल्के भी पड़े हुए हैं। लेकिन बिलो मूम यानी जनरली स्पीकिंग खून की कमी से आप दुबले होंगे, अंडरवेट होंगे या ओवरवेट होंगे। खून की कमी की वजह से आप हमेशा ओवरवेट होंगे? हमेशा ओवरवेट होंगे। हमेशा ओवरवेट होंगे। आप फूले हुए होंगे। आप थकावट आपको रहेगी। आपके मिजाज में चिड़चिड़ापन होगा। आप बात बे डांट रहे होंगे सबको। आंखों के नीचे हल्के होंगे और उसमें आप फ्रिज में से बर्फ निकाल के खा रहे होंगे या मट्टी खा रहे होंगे या पेंसिल की नोक खा रहे होंगे। इस किस्म की चीजें होती हैं और यह वो टिपिकल अलामात है यानी कि अगर कोई मोटापे का शिकार है तो उसमें विटामिन डी की डेफिशिएंसी, खून की कमी, थायरॉइड हॉर्मोंस ये चीजें जो होंगी ये सब अनबैलेंस्ड होंगी और उनमें से एक खून की कमी तो लाजमन है ही है। अच्छा कई लोगों को हमने देखा है अब क्योंकि कराची में भी मौसम दोबारा बदल रहा है ना। हम पता नहीं सर्दी में हैं। गर्मी में हमें समझ नहीं आ रहा क्योंकि वो जो ओवरकास्ट था बादल अच्छे भले आए हुए होते थे। बारिश हो रही होती थी। उससे हमें कुछ आदत ही हो गई थी ठंडे-ठंडे मौसम की। 30 32 भी बर्दाश्त नहीं हो रहा। लेकिन जो सवाल मैं आपसे करना चाह रही थी कि अगर किसी इंसान को बहुत ज्यादा गर्मी लगे और यू नो नॉर्मल टेंपरेचर है बाकी सब लोग बिल्कुल ईजीली उसको सह पा रहे हैं। लेकिन एक शख्स है जो बहुत ज्यादा हाइपर हो रहा है कि यार गर्मी बहुत है, गर्मी बहुत है। एसी चलाओ। क्या यह भी कोई अंडरलाइन प्रॉब्लम की अलामत हो सकती है? अंडरलाइन प्रॉब्लम की अलामत हो सकती है। जिन लोगों में विटामिन डी की डेफिशिएंसी होती है उन लोगों को गर्मी निस्बतन ज्यादा लगती है। अच्छा इसमें भी जींस रोल प्ले करती हैं और जेनेटिकली कुछ लोगों का होता है कि उनके पेरेंट्स में से किसी एक को पसीना बहुत ज्यादा आता था तो उनमें से आता है। तीसरा यह कि कुछ लोगों के स्वेट ग्लैंड्स जो होते हैं वो ज्यादा निस्बतन एक्टिव होते हैं। चौथा यह है कि आप अगर खुराक में जिन दिनों गर्मियां हो ऐसी चीजें इस्तेमाल कर लें जिसमें ग्रीन लीफी वेजिटेबल्स हैं वो बहुत अच्छा रोल प्ले करती हैं। रात को गोंद कतीरा सिर्फ उसका एक छोटा टुकड़ा जिसका एक मोती होता है वो आप भिगो दें तो वो सुबह फूल के इतना ज्यादा हो जाता है और वो आप सुबह निहार मुंह पी लें। तो कुदरत ने उसमें यह सलाहियत दी हुई है कि वो पूरा दिन आपको ठंडाठार रखता है। और यह वाले जो फल है तरबूज का इस्तेमाल है, मेलस का इस्तेमाल है, नींबू पानी है, मिंट लेमनेड है। तो हमने कुदरती तौर पे इन चीजों का इस्तेमाल करना है। वंस यू नो योरसेल्फ कि आपको पता है। अच्छा अगेन वेट के ऊपर आ जाते हैं। अगर आप ओवरवेट हैं या आप अंडरवेट हैं या आपका जस्ट राइट वेट है। इनमें से कौन ज्यादा जॉइंट पेन का शिकार होता है? क्योंकि एक अंदाजे के मुताबिक कहा जाता है कि अगर आपका वजन बढ़ा हुआ है तो आपके जॉइंट्स पे बोझ ज्यादा पड़ रहा है। लेकिन क्या इसका मतलब है कि जिनका वजन ठीक है उनको जॉइंट्स की बोनस की कभी प्रॉब्लम नहीं होती। नहीं जिनका वजन ज्यादा है उनको तो है क्योंकि उनका तो वजन हां पड़ रहा है लेकिन जिनका वजन ठीक भी है और वह डाइट के ऊपर मुसलसल रहते हैं और अपना वजन कम करने की कोशिशों में लगे रहते हैं एंड दे आर इनू क्रैश डाइटिंग या वो वजन कम करने की कोशिशों में लगे हुए हैं और वह खुराक के अंदर दूध और दही और अंडा और प्रोटीन वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं कर रहे विटामिन डी उन्होंने कभी भी अपना चेक नहीं किया हुआ बी12 भी उनका बिल्कुल कम है सूरज की रोशनी में वो गए ही नहीं है। रहते ही एयर कंडीशन के अंदर हैं। तो उनको ऑस्टियोपीनिया और फिर आगे बहुत जल्द ऑस्टियोपरोसिस होगा। तो जॉइंट पेंस तो बहुत जल्दी होने हैं। जिनकी खुराक बिल्कुल ठीक नहीं है और बहुत जल्दी होना है। सुपर तो क्योंकि डाइट में यस क्रैश प्लांट्स अगेन फिर वही वाली बात कि अगर किसी का कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई है। जॉइंट्स के लिए तो लोग कहते हैं कि कोलेजन लें, विटामिन डी लें, कैल्शियम लें, कैल्शियम आता है आपका फुल क्रीम दूध के साथ। फिर इसके अलावा आपकी कोलेजन की बात करें तो उसमें भी यखनी और बाकी चीजों का इस्तेमाल होता है। तो जिसका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है वो बेचारा बाकी चीजों को कैसे करेक्ट करे? जिसका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है वो दूध का इस्तेमाल कर सकता है। वो दही का इस्तेमाल कर सकता है। इन चीजों से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ सकता। दूसरा हम उसको सबसे पहले सुबह साबूदाना देते हैं। साबूदाना से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता। ठीक है? सिर्फ बटर और घी और और दूसरी बात यह कि यह भी एक मिथ है कि जिस इंसान का कोलेस्ट्रॉल बढ़ावा है वह अंडे को इस्तेमाल नहीं करेगा। अंडे का इस्तेमाल जिस इंसान का कोलेस्ट्रॉल बढ़ावा है वो अल्टरनेट डेज पे जरूर अंडे का इस्तेमाल करेगा। कंप्लीट रिसर्चेस इस पे हो चुकी हैं। ऐसा कुछ भी नहीं है जी कोलेस्ट्रॉल बढ़ावा है अंडा बंद कर दें। नो नथिंग एस सच अंडा आपको लेना है। दूध आपको लेना है। और पैदाइश से लेके कब्र तक ये दोनों चीजें आपको नहीं निकालनी। और उसके बाद जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है जैसे दूध और दही है सूरज की रोशनी इन्होंने हासिल की और प्लस इसमें नट्स हैं ओमेगा थ्री फैटी एसिड्स हैं। ये कोलेस्ट्रॉल को नहीं बढ़ाते। ये तो आपका अच्छा वाला कोलेस्ट्रॉल बढ़ाएंगे। बुरा वाला कम करेंगे। तो उसमें नट्स ले लिए। उसमें सीड्स ले लिए सारे। विटामिन ई से भरपूर सारी गजाएं हैं। ओट्स के सीरियल्स हैं। ये सारी चीजें कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाती। दालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। चावलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। फलों का इस्तेमाल है। सब्जियों का इस्तेमाल है। इसमें से कुछ भी कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता। जबरदस्त। अच्छा जी। अब आखिरी मुझे बताइएगा शुगर के हवाले से जिन लोगों की शुगर लेवल्स बढ़ी हुई होती हैं और अचानक से वो यह महसूस करें कि उनका जो नॉर्मल वजन था उन्होंने झटपट से वजन गिरा दिया है। तो लोग डॉक्टर्स फौरन आपको कहते हैं कि आप अपने शुगर लेवल्स को चेक करें। अगर शुगर लेवल्स एलिवेटेड आ रही हैं तब क्या करना चाहिए? शुगर लेवल्स अगर एलिवेटेड आ रही हैं तो एचपी एवन सी जैसे कि आपका बढ़ावा आ रहा है। ठीक है? अब उसमें दो चीजें हैं। पहले तो यह है कि आपका सबसे पहले लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन है। अगर आपने लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन कर ली है 30 मिनट की आप वॉक करते हैं जिसमें आपको पसीना आता है दबा के। ठीक है? और आपने अच्छी सी अपनी विंडो बना ली है तो थोड़ा सा वेट रिडक्शन आपको मेटफॉर्मेन के ऊपर हमें नहीं डालना पड़ेगा। ठीक है? जो जो लोग लेना भी नहीं चाहते। ठीक है? सिक्स तक आ जाता है। अगर आपका एचबी1 सी जो कि बॉर्डर लाइन डायबिटीज है तो मेटफमेन पे नहीं डालना पड़ता। वो नीचे आ जाएगा। आपका थोड़ा सा वेट लॉस हुआ। लेकिन यह है कि एचबी एवन सी नीचे नहीं आ रहा। हमने दोबारा रिपीट करवाया वो 6.2 है, 6.3 है तो फिर मैटफॉर्मेन पे भी डालना पड़ता है। अच्छी खुराक लेनी पड़ती है। और फिर वेट लॉस करने के बावजूद भी उनका फायदा नहीं हो रहा। प्रोटीन का इस्तेमाल अच्छा रखना है। बिल्कुल सही। अंडे का दो छोटे-छोटे सवालात हैं आपके लिए जो आए हैं। नंबर वन इंटरमिटेंट फास्टिंग के लोग वंडर्स की बड़ी बात कर रहे हैं। मुझे यह बताएं आयशा किन लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग सही नहीं है? कुछ लोगों ने कहा कि खवातीन के लिए सही नहीं है। बिकॉज़ इट स्ट्रेसेस देयर हॉर्मोंस आउट। उनकी बॉडी में स्ट्रेस हॉर्मोनस बढ़ जाते हैं वगैरह-वगैरह फर्टिलिटी इश्यूज होते हैं। उनको लॉन्ग आवर्स तक भूखा नहीं रहना चाहिए। इंटरमिटेंट फास्टिंग किसके लिए है और किसके लिए नहीं? इंटरमिटेंट फास्टिंग तो खवातीन के लिए बिल्कुल है। उनके तो हॉर्मोंस को यह इतना अच्छा और सेट कर देती है क्योंकि अगर आप 11:00 से 7:00 बजे की विंडो बनाते हैं हमारे यहां तो इन जनरल ये है मैं पहले आपका ये वाला जवाब दे देती हूं क्योंकि 11:00 बजे से पहले खवातीन सोके नहीं उठती है और 7:00 बजे विंडो कंप्लीट करें तो इट्स बेस्ट। लेकिन वो वाली खवातीन जो कि जिनको माइग्रेन का प्रॉब्लम हो जाता है बहुत ज्यादा। ठीक है? बूढ़े हजरात जो कि थोड़े ओवर एज हैं। छोटे बच्चे और टीनएज ग्रुप जिनके बिल्कुल एग्जाम्स सर पे हैं। किसी एग्जाम्स की वो प्रिपरेशन कर रहे हैं और वो वाले लोग जो कि जिनका शुगर लेवल बिल्कुल नीचे गिर जाता है। अगर वो बहुत ज्यादा लंबे अरसे की फास्टिंग करेंगे। हाइपोग्लाइससीमिया की तरफ वो चले जाएंगे। ओल्ड एज ग्रुप है वो बहुत ज्यादा जिनके एग्जाम्स सर पे हैं जिनका माइग्रेन बिल्कुल सेटल नहीं होता और उनको बहुत हाई डोस पेन किलर्स लेने पड़ते हैं उससे जीआई अपसेट स्टमक अपसेट हो सकता है और बहुत सारे प्रॉब्लम्स हैं वो इंटरमिटेंट फास्टिंग ना करें ना करें तो ये खास ग्रुप्स हैं जिनके लिए ज्यादा कॉम्प्लिकेशंस हो सकती हैं या तो वो हाइपोग्लाइससीमिया में चले जाएंगे या उनका माइग्रेन ट्रिगर हो जाएगा सो यू हैव टू बी केयरफुल थैंक यू सो मच आयशा फॉर वंस अगेन आई एम मेकिंग दिस पर्टिकुलर सेगमेंट सो इन पैक इसी के साथ जी हम लेते लेते हैं एक छोटा सा ब्रेक। वी विल बी राइट बैक। [संगीत]