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This video is for general informational purposes only. It should not be used to self-diagnose and it is not a substitute for a medical exam, cure, treatment, diagnosis, and prescription or recommendation. It does not create a doctor-patient relationship between Dr. Javaid Khan RPh and you. You should not make any change in your health regimen or diet before consulting a physician and obtaining a medical exam, diagnosis, and recommendation. Always seek the advice of a physician or other qualified health provider with any questions you may have regarding a medical condition.
अस्सलाम वालेकुम। थकी और भारी टांगों से जान छुड़ाने के लिए एक ऐसा बेहतरीन छुपा हुआ विटामिन जो आपके किचन में मौजूद है। लेकिन 60 साल से ऊपर के 99% लोगों को इसका पता तक नहीं होता। यह एक सादा सा गजाई अंसर है जो ना सिर्फ खून की रवानी को बेहतर करता है बल्कि बंद नसों को खोलने में मदद करता है। जिस्म से थकान दूर करता है और टांगों में दोबारा ताकत बहाल कर देता है। सबसे हैरत की बात यह है कि इसके असरात इतने जबरदस्त हैं कि डॉक्टर भी हैरान रह जाते हैं। जरा सोचिए जब आपको रोजमर्रा के काम करने में मुश्किल हो, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूल जाए, टांगों में दर्द और खिंचाव रहता हो, तो इसके लिए अक्सर डॉक्टर सिर्फ इतना कह देते हैं कि इस उम्र में यह सब होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सब बुढ़ापे की निशानी नहीं बल्कि अक्सर में खून के बहाव का मसला होता है। आज की इस वीडियो में आपको एक ऐसे विटामिन के बारे में बताएंगे जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। लेकिन यह ना सिर्फ आपकी जिंदगी बदल देगा बल्कि आपकी नसों को साफ करेगा। खून के बहाव को बेहतर करेगा और आपकी टांगों को फिर से मजबूत कर देगा। वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए क्योंकि वीडियो के आखिर में आपको बताएंगे कि वो खास गिजाएं जिनमें यह विटामिन होता है। साथ ही एक आसान सुबह का तरीका जो इस विटामिन के फायदे को 43% तक बढ़ा देता है। यह सब 2023 की एक नई रिसर्च पर मबनी है जिसे ज्यादातर डॉक्टर्स ने अभी तक नहीं देखा। तो चलिए बिना देर किए जानते हैं इस विटामिन की पूरी डिटेल। असल में 60 साल के बाद आपके जिस्म में खून की रगों में क्या होता है? आप समझते हैं कि टांगों का थक जाना बुढ़ापे की निशानी है। लेकिन असल में यह आपके जिस्म का सिग्नल होता है कि कुछ ठीक नहीं हो रहा। टांगों और पांव का सुन हो जाना, ज्यादा देर खड़े होने पर बोझ महसूस होना और घुटनों या टखनों के इर्द-गिर्द सूजन आ जाना जिसे लोग उम्र ज्यादा होने का हिस्सा समझते हैं। लेकिन यह गलत है। असल में यह आपके खून के बहाव में कोई मसला आने की निशानी होती है। 60 साल के बाद हमारी रगें पतली और सख्त होने लग जाती है। छोटी-छोटी सी तह रगों के अंदर जमने लग जाती है। जिससे खून का बहना स्लो हो जाता है। खासकर टांगों में खून का बहाव स्लो हो जाता है। यह सिर्फ तकलीफ नहीं देती बल्कि खतरनाक भी है। 2021 की एक रिसर्च में देखा गया कि जिन बुजुर्गों की टांगों में खून का बहाव कम था उनमें गिरने का खतरा 37% ज्यादा था। चलने फिरने की ताकत 42% तक कम होती थी। जिससे भरपूर जिंदगी का लुत्फ भी कम हो जाता है। जब खून का बहाव कम हो जाता है तो ऑक्सीजन और गिजा मसल्स और जिंद तक सही से नहीं पहुंच पाती। खुलिए कमजोर हो जाते हैं। वेस्ट मटेरियल्स और टॉक्सिंस जमा होना शुरू हो जाते हैं। सूजन और जलन बढ़ जाती है और टांगों और पिंडलियों में दर्द रहता है। जो जिस्म का सिग्नल होता है कि कुछ ठीक नहीं। बहुत से लोग 60 65 साल की उम्र के बाद इस मसले का शिकार हो जाते हैं। चलना मुश्किल हो जाता है। पैरों में हमेशा ठंडक रहती है। शाम तक इतनी सूजन हो जाती है कि आम जूते पहनना मुश्किल हो जाता है। अक्सर लोग कंप्रेशन सॉक्स पांव ऊंचा करके रखना या महंगी दवाइयां ट्राई करते हैं। लेकिन ज्यादा फायदा नहीं होता। फिर एक दिन रिसर्च में यह बात सामने आई कि एक खास बी विटामिन रगों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है और ज्यादातर बुजुर्गों में इसकी कमी होती है जिसे नायसिन या विटामिन बी3 कहते हैं। लोग इसको ज्यादातर कोलेस्ट्रॉल के लिए जानते हैं। लेकिन यह रगों की सेहत और खून के बहाव को डायरेक्टली बेहतर करता है। नायसिन सिर्फ खून का बहाव नहीं बढ़ाता बल्कि रगों के अंदर के डैमेज को ठीक करता है। रगों को खोल देता है ताकि खून आराम से गुजरे। सूजन कम करता है ताकि रगें नरम और मजबूत रहे। सबसे जरूरी बात यह है कि यह उन तहों को जमने से रोकता है जो रगों को खराब करके खून के बहाव को रोक देती है। रिसर्च से यह बात साबित हुई कि नाइससिन एक प्रोटीन बनाता है जिसका नाम एडीपोनेक्टिन है जो खून की रगों की दीवारों को डैमेज से बचाती है और जब यह प्रोटीन बढ़ती है तो टांगों और पांव तक खून का बहाव बहुत बेहतर हो जाता है। मायोक्लिनिक के मुताबिक नायसिन लेने वालों में खून का बहाव 27% तक बढ़ जाता है जो उम्र के साथ सबसे पहले कम होता है। नायोसिन के सप्लीमेंट लेने से पहले यह बात जरूर जान लें कि हर किस्म का नायासिन एक जैसा नहीं होता। अगर आप गलत किस्म या ज्यादा मिकदार में नासिल लें तो फायदे की बजाय नुकसान भी हो सकता है। जैसे कि चेहरे का रंग लाल हो जाना, जिस्म में जलन होना या खुजली होना, हल्का बुखार जैसा महसूस होना वगैरह हो सकता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि अगर आप नयासन लेना चाहते हैं तो सही किस्म और सही मिकदार मिले। सबसे इंपॉर्टेंट बात अगर आप किसी भी दवाई का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या खून पतला करने वाली दवाई लेते हैं तो नायसिन या किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर मशवरा करें। अब सवाल यह है कि नासिन कौन सी खुराक से पूरा किया जा सकता है? अगर आपकी उम्र 60 साल या उससे ज्यादा है और आपकी नसों में तंगी, थकान, सूजन या पांव ठंडे रहते हैं तो नाइसिन वाली गिजा आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। कुछ ऐसे खाने जो कुदरती तौर पर नयासिन से भरपूर होते हैं जैसे मुर्गी का गोश्त, टर्की का गोश्त, सालमन और टूना मछली वगैरह हो गए। इसके अलावा मूंगफली, पीनट बटर और मशरूम्स में भी बहुत होता है। एोcडो, हरे मटर, ब्राउन चावल इन सब में नासिन कुदरती तौर पर पाया जाता है। लेकिन मसला यह है कि इन तमाम चीजों के बावजूद अक्सर बुजुर्ग अफराद इनसे वो नासिन हासिल नहीं कर पाते जो उनके जिस्म को दरकार होता है। इसकी वजह यह है कि उम्र के साथ जिस्म के न्यूट्रिएंट्स जजब करने की और उसे सही से इस्तेमाल करने की सलाहियत कम हो जाती है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में एक रिसर्च से यह सामने आया कि 65 साल से ऊपर के अफराद को वही नाइससिन के फायदे हासिल करने के लिए तकरीबन 25% ज्यादा मिकदार चाहिए होती है। यह वो छुपी हुई कमी है जिसका जिक्र ना डॉक्टर करते हैं ना ज्यादा लोगों को इसका अंदाजा होता है। इसलिए जब लोग नाइसिन से भरपूर गिजा अपने रोजमर्रा के खानों में शामिल करते हैं तो फिर नतीजे हैरतंगेज होते हैं। कई लोगों ने अपने रोजमर्रा के खानों में नासिन से भरपूर गिजा शामिल की और सिर्फ चंद हफ्तों में उन्हें महसूस हुआ कि पांव की सूजन कम हो रही है। टांगों में हल्कापन आ गया है। जहां पहले पैरों में जलन या ठंड महसूस होती थी, अब वहां गर्मी और राहत होती है। आसाबी निजाम भी सही काम करने लग गया है। रात का सोना आसान हो गया है और वह पेनफुल क्रैंप्स जिनसे नींद खराब हो जाती थी, वह खत्म हो गए हैं। यह कोई जादू नहीं। यह सिर्फ उसी वक्त होता है जब आपके जिस्म को वह मिलता है जो असल में जरूरत होती है। जब खून की रवानी बेहतर होती है तो ताकत वापस आ जाती है। अब बात करते हैं उस सुबह के एक छोटे से अमल की जो लायसिन के फायदे को 43% तक बढ़ा देता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरिलन के मुताबिक रोजाना सिर्फ 8 मिनट का एक हल्काफुल्का अमल जिसे प्रोग्रेसिव सर्कुलेशन एक्टिवेशन कहा जाता है। खून के बहाव को बहुत ज्यादा बेहतर कर सकता है। कोई मुश्किल वर्जिश नहीं, कोई महंगी मशीन नहीं। बस सुबह-सुबह बिस्तर के किनारे बैठकर कुछ आसान हरकत करें। अपनी टांगों को गोल-गोल घुमाएं। दोनों सिमत में 10 दफा घुमाना है। फिर पैरों को आगे पीछे सीधा और मोड़कर यानी पॉइंट और फ्लेक्स करना है। यह अमल भी 10 मर्तबा करना है। यह सिर्फ कुछ मिनट का अमल है। लेकिन अगर नायसिन से भरपूर गजा के साथ किया जाए तो यह आपके जिस्म के कोनेकोने तक खून पहुंचाकर ताकत, हरारत और राहत देता है। अपनी पिंडलियों यानी काब का अपने हाथों से ऊपर की तरफ 2 मिनट तक मसाज करें। फिर खड़े होकर भी मालिश करें। घुटनों को ऊपर उठाते हुए यह अमल भी 2 मिनट तक जारी रखें। आखिर में अपनी टांगों और पांव को 30 सेकंड्स तक हल्का-हल्का झटका दें। यह सब नाश्ता करने से पहले करें। जब आप नासिन से भरपूर कोई गिजा लेने वाले हो, यह छोटी सी एक्सरसाइज आपके खून की रवानी को पहले से तैयार कर देती है। जिससे नासिन का असर और ज्यादा होता है। बहुत से बुजुर्ग जब यह सुबह का तरीका अपनाते हैं और नासिन से भरपूर खाने शामिल करते हैं तो सिर्फ दो हफ्तों के अंदर फर्क महसूस करने लग जाते हैं। रिसर्च से यह भी सामने आया कि लायसिन सिर्फ खून की रवानी बेहतर नहीं करता बल्कि उन नसों की मरम्मत करने में भी मदद कर सकता है जिन्हें पहले ही नुकसान हो चुका होता है। 2022 में जनरल ऑफ कार्डियोवस्कुलर फार्माकोलॉजी में एक रिसर्च के मुताबिक नायसिन का मुसलसल इस्तेमाल ना सिर्फ नसों की सख्ती कम करता है बल्कि नसों के अंदर का एक अहम हिस्सा जिसे एंडोथलियम कहते हैं। उसके काम को भी बेहतर बनाता है। यह वही हिस्सा है जो खून के बहाव को कायम रखता है। जब लोग नाइससिन से भरपूर गिजा और यह सुबह का छोटा सा अमल रोजाना शामिल करते हैं तो अक्सर में टांगों की सूजन कम हो जाती है। चलने की ताकत वापस आ जाती है। पांव का रंग बेहतर हो जाता है। ठंडक और बोझपन का एहसास कम हो जाता है। छोटा सा खुलासा यह है कि टांगों की थकान, सूजन और बेचैनी सिर्फ बुढ़ापा नहीं बल्कि खून के बहाव में बिगाड़ का नतीजा हो सकता है। नायसिन यानी विटामिन B3 एक अहम गिजाई अंसर है जो सेहतमंद नसों और बेहतरीन खून के बहाव में किरदार अदा कर सकता है। अक्सर 60 साल से ऊपर के लोग इस विटामिन की कमी का शिकार होते हैं और उन्हें इसका पता भी नहीं होता। मुर्गी, मछली, मूंगफली, मशरूम्स, एोकैडो वगैरह नायसिन से भरपूर खाने हैं और एक आसान सुबह का अमल नायसिन के फायदे को और ज्यादा बढ़ा सकता है। याद रखिए भारी थकी हुई टांगे आपका मुकद्दर नहीं। सही मालूमात और आसान आदतों के साथ अपने खून के बहाव को बेहतर कर सकते हैं और एक भरपूर जिंदगी गुजार सकते हैं। वीडियो यहां तक देखने का और चैनल पे आने का बहुत शुक्रिया। उम्मीद है वीडियो पसंद आई होगी। अगर वीडियो अच्छी लगी हो तो लाइक और शेयर करें और चैनल पे पहली दफा आए हैं तो सब्सक्राइब करें। इंशाल्लाह मिलते हैं अगली वीडियो में। अल्लाह हाफिज़।