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This video is for general informational purposes only. It should not be used to self-diagnose and it is not a substitute for a medical exam, cure, treatment, diagnosis, and prescription or recommendation. It does not create a doctor-patient relationship between Dr. Javaid Khan RPh and you. You should not make any change in your health regimen or diet before consulting a physician and obtaining a medical exam, diagnosis, and recommendation. Always seek the advice of a physician or other qualified health provider with any questions you may have regarding a medical condition.

अस्सलाम वालेकुम। कभी सोचा है हम इतनी थके हुए क्यों महसूस करते हैं? सुबह उठते ही कमजोरी, दिन भर बेचैनी, काम करते हुए सांस फूल जाना या मूड का अचानक बिगड़ जाना जिसे अक्सर काम का दबाव या स्ट्रेस समझते हैं। लेकिन असल वजह स्ट्रेस नहीं बल्कि जिस्म के अंदर कुछ छुपे हुए विटामिंस और मिनरल्स की कमी होती है। आदादो शुमार के मुताबिक पाकिस्तान के हर दो में से एक शख्स किसी ना किसी न्यूट्रिएंट डेफिशिएंसी का शिकार है। यह वो कमियां है जो आहिस्ता-आहिस्ता जिस्म का निजाम बिगाड़ देती है। आदमी सोचता है कि वह ठीक खाता है, लेकिन असल में जिस्म अंदर से कमजोर होता जाता है और जब तक हम अपने जिस्म की असल जरूरत नहीं समझते तब तक दवा भी असर नहीं करती। पाकिस्तान और इंडिया जैसे मुल्क में जहां फल, सब्जी, दाल और धूप हर जगह मौजूद है, वहां लोगों में विटामिन और मिनरल्स की कमी देखकर हैरानी भी होती है। जिसकी असल वजह यह है कि हमारी आदतें बदल गई है। पहले लोग सुबह धूप में काम करते थे। दालें और पूरा अनाज खाते थे। और आजकल इनडोर काम, पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स और चिप्स ने इनकी जगह ले ली है। और जब कुदरती चीजें नहीं मिलती तो जिस्म भी कमजोर पड़ जाता है। तो चलिए जानते हैं कौन सी घिसाई कमियां पाकिस्तान और इंडिया में सबसे ज्यादा पाई जाती है और उनका कुदरती हल क्या हो सकता है। नंबर वन विटामिन डी डेफिशिएंसी। यह वह विटामिन है जिसकी लगभग 70% लोगों में कमी पाई जाती है। सोचिए जरा इतनी धूप होने के बावजूद भी हम में विटामिन डी की कमी हो सकती है। जिसकी असल वजह हमारा लाइफस्ट है। हम सुबह घर के अंदर, दोपहर ऑफिस या स्कूल में और शाम को मोबाइल, टीवी या लैपटॉप के सामने रहते हैं और सही धूप में नहीं बैठ पाते। जबकि कुदरत ने धूप को इंसान के लिए इलाज और ताकत का जरिया बनाया है। विटामिन डी को सनशाइन विटामिन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह कुदरती तौर पर धूप से जिस्म में बनता है। यह हड्डियों के लिए सबसे जरूरी विटामिन है क्योंकि यह कैल्शियम को जज्ब करता है। विटामिन डी की कमी से कैल्शियम खाना बेकार हो जाता है क्योंकि वह सही से जजब ही नहीं होता। इससे हड्डियां कमजोर, जोड़ों में दर्द और पट्ठों में सूजन होने लगती है। लेकिन बात सिर्फ हड्डियों तक नहीं रुकती। विटामिन डी दिमाग के लिए भी बहुत जरूरी है। इसकी कमी से थकावट, गुस्सा, उदासी, ए्जायटी और डिप्रेशन तक हो सकती है। यह एक ऐसा विटामिन है जो दिल, दिमाग और रूह तीनों को मजबूत बनाता है। साइंस के मुताबिक अगर कोई शख्स रोजाना सिर्फ 10 मिनट धूप में बैठे और जिस्म का 25 से 30% हिस्सा जैसे हाथ, चेहरा या बाजू धूप में रहे तो विटामिन डी की कमी नहीं होती। सर्दियों में यह वक्त थोड़ा बढ़ जाता है। 30 मिनट से 1 घंटे तक बैठना जरूरी होता है। लेकिन जो लोग धूप से बिल्कुल दूर रहते हैं, उन्हें डॉक्टर के मशवरे से विटामिन डी3 सप्लीमेंट लेना चाहिए। मगर याद रखें असली और सबसे बेहतरीन हल कुदरती धूप ही है। खुराक में लेने के लिए मशरूम्स में थोड़ा विटामिन डी होता है। लेकिन अगर आप उन्हें पकाने से पहले एक घंटा धूप में रखते हैं तो उनका विटामिन डी कई गुना बढ़ जाता है। यह एक नेचुरल सप्लीमेंट बन जाते हैं। इसके अलावा अंडा, दूध, मछली और मक्खन भी विटामिन डी के अच्छे जरिए हैं। और एक छोटी सी बात याद रखें विटामिन डी तभी असर करता है जब साथ में विटामिन के भी लिया जाए। जो हरी सब्जियों, इंजीर और ब्रोकली में होता है। नंबर टू विटामिन बी12 डेफिशिएंसी। विटामिन बी12 बहुत जरूरी है। अगर यह विटामिन कम हो जाए तो सारा जिस्म स्लो पड़ जाता है। एनर्जी नहीं बनती, खून की कमी होती है और ब्रेन फॉग जैसे मसाइल होते हैं। सोच कमजोर हो जाती है, याददाश्त कम होने लगती है और इंसान हर वक्त बेजान सा महसूस करता है। पाकिस्तान में लगभग आधी से ज्यादा आबादी इसकी कमी का शिकार है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि बहुत लोगों को इस बात का इल्म ही नहीं होता। यह वह विटामिन है जो आपको एक्टिव, पॉजिटिव और मेंटली फ्रेश रखता है। इसकी कमी से इंसान हर वक्त थका हुआ, उदास और बेचैन महसूस करता है। इसकी कमी से ताकत कम हो जाती है, कमजोरी हो जाती है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह कमी होती क्यों है? इसकी बड़ी वजूहात में से प्रोसेस्ड खाना, स्ट्रेस और दवाइयों का गलत इस्तेमाल है। आजकल हर दूसरा बंदा एसिडिटी, गैस और डाइजेशन के मसाइल का शिकार है। इसलिए लोग एंटी एसिड जैसी मेडिसिन लेते हैं जिनसे बी12 कम जज्ब होता है। अगर किसी को गैस, एसिडिटी या कॉन्स्टिपेशन रहती है तो समझ लीजिए उनमें विटामिन बी12 कम होगा। इसके अलावा जो लोग शुगर के मरीज हैं, मैटफॉर्मिन इस्तेमाल करते हैं, उनमें भी कमी हो जाती है। विटामिन बी12 ज्यादातर गोश्त, अंडा, दूध, मछली और दही में होता है। लेकिन सब लोगों का जिस्म इसे जज्म नहीं कर पाता। खासतौर पर उन लोगों का जिनका हाजमा कमजोर हो। अब बात करते हैं कुदरती हल की। अल्लाह ताला ने हमें एक ऐसी लाजवाब चीज दी है जिसका नाम मुरिंगा यानी सुहाजना है। इसके पत्ते असल में एक कुदरती मल्टीविटामिन है। इनमें इतनी मिनरल्स, विटामिंस और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं कि अगर आप रोजाना दो चम्मच सुहाजना पाउडर, दही, दूध या पानी के साथ लें तो सिर्फ दो महीने में आपका B12 लेवल नॉर्मल हो जाता है। अगर आपको फ्रेश पत्ते मिल जाए तो और भी बेहतर है। उन्हें धूप में सुखाकर पाउडर बना लीजिए। यह पाउडर सिर्फ B12 ही नहीं बल्कि पूरे जिस्म को ताकत और नया जोश देता है। साथ ही फर्मेंटेड फूड्स जैसे दही, अचार, कांजी और लस्सी को भी अपनी डाइट में शामिल करें। यह खाने गुड बैक्टीरिया पैदा करते हैं जो बी12 को जिस्म में जज्ब करने में मदद करते हैं। आप चाहे तो सुबह एक गिलास दूध में एक चम्मच सुहाजना पाउडर मिलाकर पी सकते हैं। यह कोई आम ड्रिंक नहीं बल्कि एक नेचुरल एनर्जी बूस्टर है जो दिमाग को तेज जिस्म को ताकतवर और दिल को हल्का कर देता है। सिर्फ कुछ दिन इस्तेमाल के बाद आप महसूस करेंगे कि थकान कम हो गई है। नींद बेहतर हो गई और मूड हर वक्त पॉजिटिव रहता है। नंबर थ्री जिंक डेफिशिएंसी। अगर आपके बाल रोज गिर रहे हैं, चेहरा पीला, बेजान या डल लगता है या आपको छोटा सा इंफेक्शन भी जल्दी पकड़ लेता है, तो समझ लीजिए जिस्म में जिंक की कमी है। यह एक छोटा सा मिनरल है, लेकिन असल में यह आपके पूरे इम्यून सिस्टम का जरूरी हिस्सा है। पाकिस्तान में तकरीबन 30% लोग जिंक डेफिशिएंसी का शिकार हैं। और सबसे ज्यादा यह कमी उन लोगों में पाई जाती है जो प्रोसेस्ड और रिफाइंड खाना ज्यादा खाते हैं। जिंक को हम हीलिंग मिनरल भी कहते हैं क्योंकि यह जिस्म के हर जख्म को भरने, स्किन को बेहतर करने और बालों को मजबूत करने में मदद करता है। यह हार्मोंस को बैलेंस करता है और इम्यून सिस्टम को इतना ताकतवर बनाता है कि वायरसेस और बैक्टीरिया आसानी से असर नहीं कर पाते। मर्दों के लिए तो यह एक पावरफुल मिनरल माना जाता है क्योंकि यह टेस्टोस्टरॉन फर्टिलिटी और मसल स्ट्रेंथ सब कुछ कंट्रोल करता है। इसी तरह औरतों के लिए भी जिंक बहुत जरूरी है। यह हार्मोनल बैलेंस, ग्लोइंग स्किन और हेल्दी हेयर ग्रोथ में अहम किरदार अदा करता है। जिंक की कमी की सबसे बड़ी वजह प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड है। पहले के दौर में लोग पूरा अनाज, दालें और नट्स खाते थे। लेकिन अब वाइट फ्लोर, बेकरी आइटम्स और जंक फूड्स ने असली खुराक की जगह ले ली है। इन रिफाइंड चीजों में फाइटिक एसिड होता है जो जिंक को जिस्म में जज्ब होने से रोक देता है। मतलब आप खाना भी खा लें तो भी जिस्म उससे सही फायदा नहीं ले पाता। तिब्बे नबी और आयुर्वेददा दोनों कहते हैं कि दालें और अनाज हमेशा भिगोकर खाएं। सिर्फ चार घंटे पानी में भिगोकर रखें। फिर उसी पानी में उसे पका लें। इस सिंपल तरीके से फाइटिक एसिड कम होता है और जिंक और आयरन दोनों आसानी से जिस्म में जजब हो जाते हैं। यह पुराना नुस्खा आज भी साइंस से साबित है। खुराक में कद्दू के बीज, तिल, बादाम, अखरोट और अंडा जिंक का बेहतरीन सोर्स है। अगर आप रोजाना आधा चम्मच कद्दू के बीज खा लें तो आपको किसी टेबलेट या सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़नी। यह छोटे से बीज बालों को गिरने से रोकने, स्किन को साफ और चमकदार बनाने और इम्यूनिटी को मजबूत करने में बहुत अहम किरदार अदा करते हैं। डॉक्टर्स कहते हैं कि अगर कोई शख्स हफ्ते में तीन दफा नट्स और बीज अपनी डाइट में शामिल करें, तो उसके जिस्म का मिनरल लेवल कभी नहीं गिरता। यह सिर्फ एक डाइट नहीं बल्कि एक लाइफस्टाइल चेंज है। जितनी ज्यादा आप कुदरती चीजों का इस्तेमाल करेंगे, उतनी केमिकल सप्लीमेंट्स की जरूरत कम होगी। नंबर फोर विटामिन B9 डेफिशिएंसी। फोलेट यानी विटामिन B9 वो विटामिन है जो खून बनाता है। अगर यह कम हो जाए तो आपके मुंह में छाले, जुबान का लाल हो जाना, चेहरा पीला लगना और थकान महसूस होती है। यह सब इस बात का सिग्नल है कि जिस्म में फोलेट कम है। पाकिस्तान में तकरीबन 30 से 35% लोगों में यह कमी पाई गई है। फोलेट आपके जिस्म में नए खुलिए बनाने के लिए जरूरी है। अगर यह विटामिन कम हो जाए तो जिस्म पुराने खुलियों से ही काम चलाता रहता है और आदमी बेजान लगता है। लेकिन इसका हल बहुत आसान है। पालक, मेथी, चकंदर, धनिया और सिट्रस फ्रूट जैसे मालटे और मौसमी फोलेट से भरपूर होते हैं। अगर आप रोज सुबह एक गिलास चकंदर और गाजर का जूस पी लें तो खून साफ होता है और फोलेट लेवल बेहतर रहता है। और सबसे बेहतरीन टिप यह है कि दालें और सब्जियां एक साथ पकाएं। जैसे दाल, पालक, मेथी, चना या चकंदर की सब्जी। यह कॉम्बिनेशन नेचुरल B9 का पावर हाउस है। फोलिक एसिड टेबलेट भी ली जा सकती है लेकिन असली और देर बा फायदा सब्जियों से ही मिलता है। नंबर फाइव मैग्नीशियम डेफिशिएंसी। मैग्नीशियम वो मिनरल है जो दिल की धड़कन, नींद और स्ट्रेस तीनों को कंट्रोल करता है। अगर आपको अक्सर नींद नहीं आती, हार्ट बीट तेज रहती है या छोटी सी बात पर गुस्सा आता है तो मैग्नीशियम की कमी हो सकती है। रिसर्च कहती है कि 80% से ज्यादा हार्ड पेशेंट्स में मैग्नीशियम की कमी होती है। और यह कमी उन लोगों में ज्यादा होती है जो रोज चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं। क्योंकि यह मैग्नीशियम को यूरिन के जरिए बाहर निकाल देते हैं। पालक, केला, तिल, लौकी, खीरा, बींस और कद्दू के बीज मैग्नीशियम के नेचुरल सोर्सेस हैं। अगर आप रात को सोने से पहले थोड़ा सा तिल खा लें तो नींद गहरी और सुकून भरी होती है। मैग्नीशियम मसल्स को रिलैक्स करता है। दिमाग को सुकून देता है और ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखता है। सप्लीमेंट में मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट सबसे बेहतर रहता है। लेकिन खुराक से पूरा करना ज्यादा बेहतर है। तो यह थे कॉमन विटामिंस की डेफिशिएंसी और उनका हाल। चैनल विजिट करने का शुक्रिया। वीडियो अच्छी लगी हो तो लाइक और 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